Gauri Shankar Temple Delhi: हरतालिका तीज पर क्यों खास है यह प्राचीन शिव मंदिर? जानिए इतिहास, कथा, दर्शन और यात्रा की पूरी जानकारी
पुरानी दिल्ली की गलियों में चलते हुए जब आप चांदनी चौक के आसपास पहुंचते हैं, तो चारों तरफ बाजार की भीड़, दुकानों की आवाजें और लोगों की भागदौड़ दिखाई देती है। इसी पुराने दिल्ली के माहौल के बीच एक ऐसा मंदिर है, जहां पहुंचकर वातावरण अचानक आध्यात्मिक महसूस होने लगता है—गौरी शंकर मंदिर।
यह मंदिर भगवान शिव और माता गौरी को समर्पित है और चांदनी चौक के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। दिल्ली पर्यटन भी चांदनी चौक मेट्रो स्टेशन से पहुंचने वाले प्रमुख दर्शनीय स्थलों में गौरी शंकर मंदिर को शामिल करता है।

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लेकिन सितंबर 2026 में इस मंदिर की चर्चा का एक खास कारण और है—हरतालिका तीज।
2026 में हरतालिका तीज 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है।
आखिर हरतालिका तीज का माता पार्वती और भगवान शिव से क्या संबंध है? गौरी शंकर मंदिर क्यों खास है? और अगर आप दिल्ली से बाहर से यहां दर्शन करने आ रहे हैं तो कैसे पहुंचें, कहां रुकें और चांदनी चौक में क्या खाएं?
चलिए पूरी जानकारी आसान भाषा में जानते हैं।
🛕 गौरी शंकर मंदिर दिल्ली किस लिए प्रसिद्ध है?
गौरी शंकर मंदिर भगवान शिव और माता गौरी की आराधना के लिए प्रसिद्ध है।
मंदिर का नाम भी इसी शिव-पार्वती स्वरूप से जुड़ा है—गौरी यानी माता पार्वती और शंकर यानी भगवान शिव।
यह मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक धार्मिक वातावरण का भी हिस्सा है। मंदिर के आसपास ही दिगंबर जैन लाल मंदिर, शीशगंज गुरुद्वारा, लाल किला और चांदनी चौक जैसे प्रसिद्ध स्थान हैं। दिल्ली पर्यटन की आधिकारिक Metro Itinerary में भी इन स्थलों को Chandni Chowk Metro के आसपास के attractions में रखा गया है।
🌺 हरतालिका तीज क्या है और इसका शिव-पार्वती से क्या संबंध है?
हरतालिका तीज की कहानी सीधे माता पार्वती की भगवान शिव को पति रूप में पाने की तपस्या से जुड़ी मानी जाती है।
पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने कठोर तपस्या की।
कथा में आता है कि पार्वती जी के पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे। लेकिन पार्वती जी का मन भगवान शिव में था। अपनी सखी की मदद से वह ऐसी जगह चली गईं जहां उन्होंने शिव की आराधना और तपस्या जारी रखी।
माता पार्वती की इसी दृढ़ भक्ति और तपस्या की स्मृति में हरतालिका तीज का व्रत मनाया जाता है।
यही वजह है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
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❤️ हरतालिका तीज पर महिलाएं व्रत क्यों रखती हैं?
हरतालिका तीज मुख्य रूप से महिलाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत है।
कई विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित महिलाएं अच्छे जीवनसाथी की कामना से भी यह व्रत करती हैं।
परंपरा में यह व्रत कठिन माना जाता है और कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। हालांकि व्रत की विधि और नियम परिवार तथा क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
2026 में हरतालिका तीज सोमवार, 14 सितंबर को है।

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🏛️ गौरी शंकर मंदिर का इतिहास कितना पुराना है?
यहां एक बात समझना जरूरी है।
गौरी शंकर मंदिर को कई जगह करीब 800 वर्ष पुराना बताया जाता है, खासकर मंदिर में मौजूद प्राचीन शिवलिंग के संदर्भ में। वहीं मंदिर की वर्तमान ऐतिहासिक संरचना से जुड़ी जानकारी में 1761 का वर्ष महत्वपूर्ण माना जाता है।
ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार मराठा सैनिक आपा गंगाधर ने 1761 में मंदिर का भवन बनवाया था। एक पुराने विवरण में यह भी बताया गया है कि वह युद्ध में घायल होने के बाद भगवान शिव की शरण में आए थे और मंदिर से जुड़ी उनकी आस्था की कथा प्रचलित हुई।
एक ऐतिहासिक अध्ययन भी 1761 में आपा गंगाधर द्वारा मंदिर निर्माण का उल्लेख करता है।
🔱 मंदिर के शिवलिंग की क्या खासियत है?
मंदिर में भगवान शिव की पूजा शिवलिंग के रूप में होती है। उपलब्ध मंदिर विवरणों में इसे प्राचीन शिवलिंग बताया गया है और इसके आसपास नागों की आकृतियों का उल्लेख मिलता है।
भक्तों के लिए सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां शिव और शक्ति दोनों की आराधना का भाव मिलता है।
इसी कारण शिव-पार्वती विवाह, सुहाग और दांपत्य जीवन से जुड़े पर्वों पर इस मंदिर का धार्मिक महत्व श्रद्धालुओं के लिए और बढ़ जाता है।

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🚇 Gauri Shankar Temple कैसे पहुंचें?
🚇 Metro से
अगर आप दिल्ली में पहली बार आ रहे हैं तो Metro सबसे आसान विकल्पों में से एक है।
Chandni Chowk Metro Station उतरना सुविधाजनक रहेगा।
मेट्रो से निकलने के बाद Old Delhi की भीड़ और बाजारों के बीच पैदल या स्थानीय ई-रिक्शा से मंदिर की तरफ जाया जा सकता है।
🚆 ट्रेन से
अगर आप दूसरे शहर से ट्रेन से दिल्ली आ रहे हैं तो Old Delhi Railway Station क्षेत्र आपके लिए व्यावहारिक विकल्प रहेगा। वहां से मंदिर चांदनी चौक क्षेत्र में ही है और स्थानीय ऑटो/ई-रिक्शा से पहुंचा जा सकता है।
✈️ बाहर के शहर से Flight से
अगर आप दिल्ली हवाई अड्डे पर उतर रहे हैं तो Airport से Metro लेकर Old Delhi/Chandni Chowk की तरफ आना सुविधाजनक हो सकता है। भारी traffic के समय taxi की तुलना में Metro कई यात्रियों के लिए practical विकल्प बन सकती है।
🚗 अपनी गाड़ी से?
यहां मेरी सलाह थोड़ी अलग है।
अपनी गाड़ी सीधे मंदिर के पास लेकर जाने की कोशिश न करें।
चांदनी चौक की गलियां और बाजार काफी भीड़भाड़ वाले हैं। खासकर त्योहार के दिन parking और traffic दोनों परेशानी दे सकते हैं।
बेहतर है कि वाहन को उपलब्ध वैध parking क्षेत्र में छोड़कर आगे पैदल या स्थानीय transport का इस्तेमाल करें।

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⏰ मंदिर कितने बजे खुलता है?
मंदिर के लिए सुबह 4 बजे से दोपहर 12 बजे और शाम 4 बजे से रात 8:45 बजे तक का समय दिया गया है।
लेकिन यहां एक जरूरी बात है:
त्योहार वाले दिन सामान्य timing पर भरोसा करके न निकलें।
हरतालिका तीज जैसे बड़े पर्व पर पूजा, भीड़ और दर्शन व्यवस्था बदल सकती है। इसलिए 14 सितंबर 2026 को जाने से पहले मंदिर की स्थानीय व्यवस्था से समय confirm करना सबसे सुरक्षित रहेगा।
🏨 गौरी शंकर मंदिर के पास कहां रुकें?
अगर आप दिल्ली से बाहर से आ रहे हैं और मंदिर के साथ पुरानी दिल्ली भी घूमना चाहते हैं तो Chandni Chowk, Red Fort या आसपास के Old Delhi area में रुकना सुविधाजनक हो सकता है।
🍴 चांदनी चौक में क्या खाएं?
गौरी शंकर मंदिर जाने का एक मजेदार हिस्सा यह भी है कि दर्शन के बाद पुरानी दिल्ली का खाना try किया जा सकता है।
चांदनी चौक और आसपास आप अपनी पसंद के हिसाब से:
🥨 जलेबी
🫓 पराठे
🥘 छोले-भटूरे
🍛 पुरानी दिल्ली का खाना
🍨 कुल्फी
🍬 मिठाइयां
try कर सकते हैं।
अगर आप शाकाहारी हैं या व्रत के लिए दिल्ली आए हैं तो खाने से पहले restaurant में ingredients और vrat-friendly options जरूर पूछें, क्योंकि हर जगह व्रत का भोजन उपलब्ध हो यह जरूरी नहीं है।
🗺️ मंदिर के साथ ये जगहें भी घूम सकते हैं
अगर आपने सिर्फ मंदिर देखने के लिए दिल्ली आने का plan बनाया है तो मेरा सुझाव है कि पूरा दिन केवल मंदिर में न लगाएं।
एक अच्छा Old Delhi route कुछ ऐसा हो सकता है:
गौरी शंकर मंदिर → दिगंबर जैन लाल मंदिर → शीशगंज गुरुद्वारा → चांदनी चौक → लाल किला → जामा मस्जिद
इनमें से कई जगहें Chandni Chowk Metro के आसपास हैं l
अगर समय कम है तो मंदिर + चांदनी चौक + लाल किला वाला plan भी काफी रहेगा।
🧳 पहली बार जाने वालों के लिए जरूरी Tips
1. त्योहार के दिन सुबह जल्दी पहुंचें।
भीड़ सामान्य दिनों से ज्यादा हो सकती है।
2. चांदनी चौक में comfortable footwear पहनें।
काफी walking करनी पड़ सकती है।
3. बहुत ज्यादा सामान लेकर न जाएं।
भीड़ में छोटे सामान संभालना मुश्किल हो सकता है।
4. बुजुर्गों के साथ जा रहे हैं तो भीड़ का ध्यान रखें।
ई-रिक्शा/पैदल route पहले तय कर लें।
5. Parking पर निर्भर होकर plan न बनाएं।
6. मंदिर की पूजा व्यवस्था और timing त्योहार से पहले confirm करें।
7. अगर व्रत है तो खाने-पीने की planning पहले करें।

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❓ FAQ
1.Gauri Shankar Mandir किस लिए प्रसिद्ध है?
यह भगवान शिव और माता गौरी को समर्पित ऐतिहासिक मंदिर है और Old Delhi के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।
2.Gauri Shankar Temple का इतिहास क्या है?
मंदिर की प्राचीनता को लेकर 800 वर्ष पुराने शिवलिंग की मान्यता मिलती है, जबकि वर्तमान मंदिर भवन से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी में 1761 में मराठा सैनिक आपा गंगाधर द्वारा निर्माण का उल्लेख मिलता है।
3.Gauri Shankar Mandir कहां है?
यह पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक क्षेत्र में स्थित है।
4.Gauri Shankar Temple जाने के लिए कौन-सी Metro लें?
Chandni Chowk Metro Station सबसे सुविधाजनक विकल्पों में से एक है।
5.Hartalika Teej 2026 कब है?
14 सितंबर 2026, सोमवार। दिल्ली के लिए पंचांग गणना भी यही तारीख देती है।
6.हरतालिका तीज पर गौरी शंकर मंदिर क्यों खास है?
क्योंकि हरतालिका तीज माता पार्वती की भगवान शिव को पति रूप में पाने की तपस्या और शिव-पार्वती की आराधना से जुड़ा पर्व है, जबकि गौरी शंकर मंदिर में भी शिव और गौरी की पूजा होती है।
🌸 निष्कर्ष
गौरी शंकर मंदिर की सबसे खूबसूरत बात शायद यही है कि यहां आपको दिल्ली का इतिहास और धार्मिक आस्था एक ही जगह मिलती है।
बाहर निकलते ही चांदनी चौक की चहल-पहल है, लेकिन मंदिर के भीतर शिव और गौरी की आराधना का शांत वातावरण अलग अनुभव देता है।
और 14 सितंबर 2026 की हरतालिका तीज इस मंदिर को देखने का एक खास अवसर हो सकता है। अगर आप उस दिन यहां जाने की सोच रहे हैं तो भीड़ को ध्यान में रखकर सुबह जल्दी पहुंचने और मंदिर की उस दिन की दर्शन व्यवस्था पहले confirm करने की मेरी सलाह रहेगी।
DevYatraa के traveller के लिए मेरी एक लाइन की सलाह:
“दर्शन के लिए गौरी शंकर मंदिर जाएं, लेकिन समय निकालकर पुरानी दिल्ली की गलियों, बाजार और खाने का अनुभव जरूर लें—तभी यह यात्रा पूरी लगेगी।”
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✍️ Meet Our Writers
Punam Singh & Nahid Parween
Writers at DevYatraa
Punam Singh is a graduate and homemaker from Jamshedpur, Jharkhand. She began her writing journey with DevYatraa and is continuously learning and growing as a writer. Her work focuses on Indian temples, their history, and practical travel information.
Nahid Parween is a graduate, homemaker, and writer from Dhanbad, Jharkhand. Alongside writing for DevYatraa, she is preparing for a teaching career and working on her first book, which is nearing completion. She writes about Indian temples and religious destinations.
Together, Punam and Nahid aim to make temple and travel information simple, practical, and useful for travelers across India.
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