Vishwakarma Temple Guwahati: विश्वकर्मा पूजा पर इस अनोखे मंदिर की यात्रा कैसे करें? पूरी Travel Guide
अगर आप भगवान विश्वकर्मा के मंदिर में दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो गुवाहाटी का Vishwakarma Temple आपके लिए खास जगह हो सकती है। यह मंदिर गुवाहाटी के Kamakhya Gate और Nilachal Hills की तलहटी में स्थित है और इसकी स्थापना 1965 में हुई थी।
यह जगह खास तौर पर Vishwakarma Puja के समय काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। हर साल 17 सितंबर के आसपास यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
लेकिन अगर आप असम से बाहर से आ रहे हैं, तो केवल मंदिर की जानकारी जानना काफी नहीं है।
आपको यह भी पता होना चाहिए कि—
मंदिर तक कैसे पहुंचें?
कौन सा रेलवे स्टेशन सुविधाजनक रहेगा?
Airport से कैसे आएं?
रात में कहां रुकें?
गुवाहाटी में क्या खाएं?
मंदिर के साथ कौन-कौन सी जगह घूम सकते हैं?
इसलिए इस लेख में हम Vishwakarma Temple Guwahati की पूरी यात्रा को आसान तरीके से समझेंगे।

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मंदिर की सबसे खास बात ⭐
Vishwakarma Temple Guwahati की सबसे दिलचस्प बात इसकी स्थापना से जुड़ी कहानी है।
मंदिर Kamakhya Gate पर Nilachal Hills की तलहटी में स्थित है और इसे 1965 में स्थापित किया गया था। मंदिर की शुरुआत Kamakhya Temple की ओर जाने वाली सड़क के निर्माण के समय हुई थी। सड़क निर्माण के दौरान चट्टानों को तोड़ने का काम चल रहा था और इसी दौरान भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित की गई। बाद में उसी स्थान पर स्थायी मंदिर बनाया गया।
यही वजह है कि मंदिर का संबंध केवल धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि निर्माण, वास्तुकला और मशीनरी के देवता भगवान विश्वकर्मा से भी जुड़ता है।
यहां की 2–3 खास बातें
यह असम का प्रमुख भगवान विश्वकर्मा मंदिर माना जाता है।
मंदिर की स्थापना 1965 में हुई।
17 सितंबर Vishwakarma Puja के दिन यहां विशेष भीड़ रहती है।
मंदिर का इतिहास
मंदिर की कहानी गुवाहाटी के Kamakhya Temple तक जाने वाली सड़क के निर्माण से जुड़ी हुई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, Kamakhya Temple की पहली motorable road के निर्माण के दौरान यहां चट्टानों को तोड़ने का काम किया जा रहा था। इसी दौरान भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित की गई और बाद में इसे स्थायी मंदिर का रूप दिया गया।
इस मंदिर की स्थापना में Bhabakanta Sarmah, जो Kamakhya Temple के पुजारी थे, और contractor Mahabir Prasad Dhirasaria की भूमिका बताई जाती है।
आज मंदिर की सबसे बड़ी पहचान यही है कि यह भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक विशिष्ट मंदिर है और Vishwakarma Puja पर यहां विशेष आयोजन होते हैं।
धार्मिक महत्व 🙏
भगवान विश्वकर्मा को हिंदू परंपरा में देवताओं के शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण-कला के देवता माना जाता है।
इसलिए विश्वकर्मा पूजा के दिन खास तौर पर—
मशीनरी
औजार
वाहन
कारखानों और workshops में इस्तेमाल होने वाले उपकरण
निर्माण से जुड़े सामान
की पूजा की जाती है।
गुवाहाटी के इस मंदिर में भी Vishwakarma Puja के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। 17 सितंबर को मंदिर में बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों/मशीनरी की पूजा करने आते हैं।
अगर आप इसी दिन यात्रा करने वाले हैं, तो सुबह जल्दी पहुंचना बेहतर रहेगा।

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मंदिर की विशेषताएं 🔔
Vishwakarma Temple को किसी बहुत बड़े tourist complex की तरह देखने के बजाय इसे आस्था और Vishwakarma Puja से जुड़े विशेष मंदिर के रूप में समझना बेहतर है।
इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी location भी है।
मंदिर Kamakhya Gate और Nilachal Hills के पास है। यानी यहां दर्शन के बाद आप आसानी से अपनी यात्रा को Kamakhya Temple और गुवाहाटी के दूसरे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक बढ़ा सकते हैं।
पूजा पूजा और त्यौहार
इस मंदिर के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवसर है Vishwakarma Puja।
भारत में सामान्य तौर पर Vishwakarma Puja 17 सितंबर को मनाई जाती है और गुवाहाटी के इस मंदिर में भी इसी दिन विशेष पूजा होती है।
सामान्य दिनों से ज्यादा भीड़ हो सकती है।
पूजा और दर्शन में अधिक समय लग सकता है।
सड़क पर traffic बढ़ सकता है।
सुबह जल्दी पहुंचना ज्यादा सुविधाजनक रहेगा।
इसलिए festival day पर “पहले मंदिर, बाद में sightseeing” वाला plan बेहतर रहेगा।
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मंदिर से जुड़े प्रसिद्ध कथा/मान्यता
इस मंदिर की सबसे खास कहानी किसी बहुत प्राचीन पौराणिक घटना के बजाय इसके निर्माण से जुड़ी स्थानीय परंपरा है।
Kamakhya की ओर जाने वाली road construction के दौरान भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित किए जाने के बाद स्थायी मंदिर बनाने का विचार सामने आया। बाद में उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण हुआ।
यानी अगर आप यहां दर्शन करने जाते हैं तो मंदिर की कहानी आपको भगवान विश्वकर्मा और निर्माण कार्य के बीच संबंध को समझने में मदद करती है।
मंदिर कब जाना चाहिए?
Vishwakarma Temple जाने का सबसे खास समय Vishwakarma Puja वाला दिन है।
लेकिन अगर आपकी प्राथमिकता शांत दर्शन है, तो festival day के बजाय सामान्य दिन चुनना ज्यादा आरामदायक हो सकता है।
Festival day पर मेरी सलाह
सुबह जल्दी जाएं → दर्शन करें → नाश्ता करें → उसके बाद Kamakhya Temple जाएं।
मंदिर की सामान्य opening/closing timing की ऑनलाइन जानकारी अलग-अलग जगहों पर बदल सकती है, इसलिए यात्रा से पहले स्थानीय स्तर पर timing जरूर confirm करें।

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कैसे पहुंचें? 🚆✈️
✈️ Airport से
गुवाहाटी का Lokpriya Gopinath Bordoloi International Airport (GAU) सबसे प्रमुख airport है।
Airport से आप:
Prepaid Taxi
App-based Cab
Local Taxi
Auto
ASTC Bus
का इस्तेमाल कर सकते हैं।
🚆 Railway Station से
अगर आप ट्रेन से आ रहे हैं तो दो नाम याद रखें:
Kamakhya Junction (KYQ)
Guwahati Railway Station (GHY)
Vishwakarma Temple Kamakhya Gate के पास होने के कारण Kamakhya side में उतरना सुविधाजनक हो सकता है, खासकर अगर आपकी train Kamakhya Junction पर रुकती है।
Kamakhya Junction से Kamakhya Gate क्षेत्र बहुत पास है।
अगर आपकी ट्रेन Guwahati Railway Station तक आती है, तो वहां से taxi/auto/cab लेकर Kamakhya Gate की तरफ जा सकते हैं।
🚌 Bus/Road से
गुवाहाटी Assam और Northeast के कई शहरों से road network से जुड़ा है।
अगर आप बस से आ रहे हैं तो ISBT Guwahati प्रमुख bus terminal है। वहां से city transport या cab लेकर Kamakhya Gate की तरफ जाना आसान रहेगा।
कहां रुकें? 🏨
अगर आप सिर्फ मंदिर देखकर उसी दिन वापस नहीं जा रहे हैं, तो Guwahati में 1–2 रात रुकना ज्यादा अच्छा रहेगा।
अगर आपका मुख्य उद्देश्य मंदिर है
Kamakhya / Maligaon side में होटल लेना सुविधाजनक हो सकता है।
अगर आपको Guwahati sightseeing भी करनी है
Paltan Bazaar / central Guwahati में रुकने से city के दूसरे हिस्सों में आने-जाने के विकल्प ज्यादा मिलेंगे।
आसपास घूमने की जगहें 📍
इस मंदिर की सबसे बड़ी travel advantage यही है कि इसके आसपास गुवाहाटी के कई प्रसिद्ध स्थान हैं।
1. Kamakhya Temple
यह आपकी यात्रा का सबसे natural next stop है। Kamakhya Temple Nilachal Hill पर स्थित गुवाहाटी का प्रमुख pilgrimage destination है।
2. Umananda Temple
Brahmaputra River के बीच Umananda पर स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यहां जाने के लिए ferry/boat का इस्तेमाल करना पड़ता है।
3. Navagraha Temple
Chitrasal Hill पर स्थित Navagraha Temple नौ ग्रहों को समर्पित है।
4. Sukreswar Temple
अगर आप धार्मिक यात्रा को थोड़ा और बढ़ाना चाहते हैं तो Brahmaputra के किनारे स्थित Sukreswar Temple को भी itinerary में जोड़ सकते हैं।

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क्या खाएं? 🍛
गुवाहाटी की यात्रा में सिर्फ दर्शन करके वापस लौटना अधूरा सा लगेगा। यहां आपको Assamese food जरूर try करना चाहिए।
आप अपनी पसंद के अनुसार:
Assamese Thali
Rice-based Assamese dishes
Local vegetarian food
North Indian food
South Indian food
सामान्य restaurant food
ले सकते हैं।
अगर पहली बार Assam जा रहे हैं तो किसी अच्छे local restaurant में Assamese thali जरूर try करें।
Travel tip: बहुत ज्यादा भीड़ वाले festival day पर मंदिर के आसपास खाना ढूंढने के बजाय अपने hotel/known restaurant area में meal plan करना ज्यादा सुविधाजनक हो सकता है।
यात्रा में जरूरी बातें ⚠️
📸 Photography
मंदिर के अंदर photography की अनुमति है या नहीं, यह मौके पर लगे नियमों के अनुसार ही तय करें।
👕 कपड़े
धार्मिक स्थल होने के कारण सादे और comfortable कपड़े पहनकर जाना बेहतर रहेगा।
👟 Footwear
दर्शन के दौरान जूते उतारने पड़ सकते हैं, इसलिए आसानी से उतारे-पहने जाने वाले footwear रखें।
💧 पानी
September में Guwahati में गर्मी और humidity महसूस हो सकती है। पानी साथ रखें।
🚗 Puja के दिन traffic
17 सितंबर के आसपास traffic और भीड़ बढ़ सकती है। इसलिए cab/auto के लिए extra time रखें।
📱 Local transport
Airport पर official transport options जैसे prepaid taxi, app-based cab, ASTC bus आदि उपलब्ध हैं।
Best Time to Visit
अगर आपका उद्देश्य Vishwakarma Puja का माहौल और विशेष पूजा देखना है, तो 17 सितंबर सबसे महत्वपूर्ण दिन है।
लेकिन अगर आपका उद्देश्य शांत वातावरण में दर्शन और आराम से sightseeing करना है, तो festival day के बजाय आसपास की दूसरी तारीख बेहतर हो सकती है।
अगर आप पुजा के दिन जा रहे हैं:
सुबह: Vishwakarma Temple
इसके बाद: Kamakhya Temple
दोपहर: Lunch + आराम
शाम: Guwahati sightseeing
भीड़ को देखते हुए उस दिन बहुत ज्यादा जगहें एक साथ ठूंसने की कोशिश न करें।
कितने दिन चाहिए?
सिर्फ Vishwakarma Temple
कुछ घंटे पर्याप्त हैं।
Vishwakarma Temple + Kamakhya Temple
1 दिन पर्याप्त हो सकता है।
Guwahati धार्मिक यात्रा 2 दिन रखें।
मेरा सुझाया हुआ 2-Day Plan
Day 1:
Vishwakarma Temple → Kamakhya Temple → आराम → शाम को आसपास की sightseeing
Day 2:
Umananda Temple → Navagraha Temple → Brahmaputra area → शहर में shopping/food

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FAQ – 5–8 सवाल
Q1. Vishwakarma Temple Guwahati कहां है?
यह Kamakhya Gate, Nilachal Hills की तलहटी, Guwahati, Assam में स्थित है।
Q2. Vishwakarma Temple Guwahati कब बनाया गया था?
मंदिर की स्थापना 1965 में हुई थी।
Q3. Vishwakarma Temple Guwahati में Vishwakarma Puja कब होती है?
हर साल 17 सितंबर को Vishwakarma Puja के अवसर पर यहां विशेष पूजा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की परंपरा है।
Q4. Vishwakarma Temple के लिए कौन सा रेलवे स्टेशन अच्छा है?
Kamakhya Junction (KYQ) सुविधाजनक विकल्प है, क्योंकि मंदिर Kamakhya Gate क्षेत्र में है।
Q5. Guwahati Airport से Vishwakarma Temple कैसे जाएं?
Airport से cab, prepaid taxi, auto या ASTC bus से Kamakhya की तरफ जा सकते हैं।
Q6. क्या Vishwakarma Temple के साथ Kamakhya Temple घूम सकते हैं?
हां। दोनों को एक ही यात्रा में शामिल करना सबसे practical options में से एक है।
Q7. Vishwakarma Temple के पास कहां रुकें?
Kamakhya/Maligaon side या central Guwahati में hotel लेना आपकी यात्रा के हिसाब से सुविधाजनक रहेगा।
Q8. Guwahati में Vishwakarma Temple घूमने के लिए कितने दिन रखें?
सिर्फ मंदिर के लिए कुछ घंटे, मंदिर + Kamakhya के लिए 1 दिन और Guwahati की प्रमुख धार्मिक जगहों के लिए 2 दिन रखना बेहतर रहेगा।
Conclusion
अगर आपकी यात्रा का उद्देश्य भगवान विश्वकर्मा के दर्शन के साथ गुवाहाटी को भी समझना है, तो Vishwakarma Temple एक अच्छा starting point बन सकता है। खासकर 17 सितंबर की Vishwakarma Puja के समय यहां जाने का अनुभव अलग हो सकता है।
सबसे अच्छी बात यह है कि इस यात्रा को केवल एक मंदिर तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है। Vishwakarma Temple → Kamakhya Temple → Umananda Temple → Navagraha Temple को जोड़कर आप 1–2 दिन की एक अच्छी spiritual यात्रा बना सकते हैं।
DevYatraa की सलाह: अगर आप बाहर से गुवाहाटी आ रहे हैं, तो पहले transport और hotel तय करें, फिर मंदिर का दर्शन रखें। इससे आपकी यात्रा में जल्दबाजी कम होगी और आप दर्शन के साथ Guwahati की असली यात्रा भी आराम से कर पाएंगे।
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✍️ Meet Our Writers
Punam Singh & Nahid Parween
Writers at DevYatraa
Punam Singh is a graduate and homemaker from Jamshedpur, Jharkhand. She began her writing journey with DevYatraa and is continuously learning and growing as a writer. Her work focuses on Indian temples, their history, and practical travel information.
Nahid Parween is a graduate, homemaker, and writer from Dhanbad, Jharkhand. Alongside writing for DevYatraa, she is preparing for a teaching career and working on her first book, which is nearing completion. She writes about Indian temples and religious destinations.
Together, Punam and Nahid aim to make temple and travel information simple, practical, and useful for travelers across India.
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